नवाबगंज-बहराइच। विकास खण्ड नवाबगंज में बीते पांच वर्षों के दौरान मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सामाजिक संस्था ने मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं और ठेकेदारी प्रथा के चलते भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। संस्था का आरोप है कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन कई स्थानों पर कार्यों के संचालन में ठेकेदारों और बिचौलियों की भूमिका बढ़ने से योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। संस्था ने पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत कार्यों, मजदूरों की हाजिरी, मस्टर रोल, भुगतान, सामग्री खरीद, कार्यस्थल और कराए गए कार्यों की जमीनी जांच कराने की मांग की है। संस्था ने सवाल उठाया है कि यदि मनरेगा का काम मजदूरों के माध्यम से कराया जाना है तो फिर ठेकेदारी व्यवस्था जैसी स्थिति कैसे बनी? किन ग्राम पंचायतों में किन कार्यों पर कितना धन खर्च हुआ और वास्तविक रूप से मौके पर कितना काम हुआ—इसकी जांच जरूरी है। संस्था ने प्रशासन से मांग की है कि नवाबगंज विकास खण्ड की सभी ग्राम पंचायतों में बीते पांच वर्षों के मनरेगा कार्यों का अभिलेखीय एवं स्थलीय सत्यापन कराया जाए। जांच में अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों अथवा अन्य संबंधित लोगों की भूमिका तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। संस्था का कहना है कि मनरेगा गरीब और ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार की महत्वपूर्ण योजना है। इसमें किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता की शिकायतों को गंभीरता से लेकर पारदर्शी जांच कराना जरूरी है, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।


