चरदा-बहराइच। क्षेत्र में गेहूं की कालाबाजारी का खेल अब संगठित रूप ले चुका है। मिली जानकारी के अनुसार सरकारी गोदामों से आपूर्ति दिखाकर बिचौलियों का एक बड़ा गिरोह सरकारी तंत्र की मिलीभगत से लाखों क्विंटल गेहूं विदेशों में ऊंचे दामों पर खपाने में जुटा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जहां किसानों से मात्र ₹936 प्रति बैग की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है, वहीं वही गेहूं ₹1500 से ₹1800 प्रति बोरी तक विदेशों में बेचा जा रहा है। यानी एक बोरी पर लगभग ₹600 से ₹800 तक का सीधा मुनाफा बिचौलियों की जेब में जा रहा है, जबकि किसानों को उनके हक का मूल्य तक नहीं मिल पा रहा।
जानकारों के अनुसार इस पूरे गोरखधंधे में विभागीय अधिकारियों, गोदाम कर्मचारियों और कुछ प्रभावशाली व्यापारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का खेल चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा अनाज घोटाला होने के बावजूद प्रशासन और खाद्य विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरकारी गेहूं को ट्रकों में भरकर रातों-रात सीमा क्षेत्रों से बाहर भेजा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि प्रशासन की नीयत साफ होती तो इतनी बड़ी मात्रा में अनाज की तस्करी संभव ही नहीं थी। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस कालाबाजारी की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ कालाबाजारी नहीं, बल्कि किसानों के परिश्रम पर किया गया डाका है।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस करोड़ों के घोटाले पर कब जागता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। जनता और किसान दोनों ही जवाब मांग रहे हैं — आखिर “गेहूं का सोना” कौन लूट रहा है और क्यों अधिकारी खामोश हैं?


