रुपईडीहा-बहराइच। भारत-नेपाल सीमा से सटे रूपईडीहा कस्बे में नशे का अवैध कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। गुमटियों, मेडिकल स्टोरों और सुनसान इलाकों में खुलेआम नशीले पदार्थों की बिक्री की चर्चाएं आम हो चुकी हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि कस्बे में चिप्पड़ गांजा, नशीली गोलियां और अन्य मादक पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। खासकर युवाओं में इसकी लत तेजी से बढ़ रही है, जिससे सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है। अभिभावकों में चिंता का माहौल है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती नजर आ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी खुली गतिविधियों के बावजूद प्रशासन अनजान कैसे बना हुआ है? क्या जिम्मेदारों तक इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानकर भी आंखें मूंद ली गई हैं? कस्बे में यह चर्चा भी जोरों पर है कि कहीं इस अवैध कारोबार के पीछे “चमचमाते सिक्कों” का खेल तो नहीं चल रहा। यदि ऐसा है तो यह न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल है, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सघन जांच कराए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही, नशा मुक्त अभियान को प्रभावी ढंग से चलाकर युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने की पहल की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर कब तक चुप्पी साधे रहते हैं, या फिर कोई ठोस कदम उठाकर इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाते



